Monday, 6 March 2017

क्यों पढ़ें यह किताब : 'मुझे बनना है UPSC टॉपर' : लेखक- निशान्त जैन (प्रकाशक- प्रभात प्रकाशन, दिल्ली)

'मुझे बनना है UPSC टॉपर' - निशान्त जैन, IAS 
(Rank 13, UPSC-2014, हिन्दी माध्यम टॉपर)

(सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए सर्वश्रेष्ठ मार्गदर्शक पुस्तक)


किताब के बारे में...

गत वर्ष सिविल सेवा परीक्षा में 13 वीं रैंक हासिल कर हिन्दी माध्यम में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाले 2015 बैच के प्रशिक्षु आई.ए.एस. अधिकारी निशान्त जैन की पहली किताब 'मुझे बनना है UPSC टॉपर' अब बाज़ार में व ऑनलाइन उपलब्ध है। प्रभात प्रकाशन, नयी दिल्ली द्वारा प्रकाशित इस किताब में निशान्त जैन ने IAS व PCS परीक्षाओं की सम्पूर्ण तैयारी से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला है।
कुल 18 अध्यायों के माध्यम से उन्होंने नए पैटर्न के मुताबिक़ प्री, मेन्स, इंटरव्यू तीनों चरणों की रणनीति, निबंध, लेखन कौशल, व्यक्तित्व विकास, मोटिवेशन लेवल, स्टडी मैटेरियल आदि सब पर खुलकर सहज भाषा में चर्चा की है। पुस्तक के अंत में हाल के वर्षों में सिविल सेवा परीक्षा में सफल कुछ चुनिंदा युवाओं की सफलता की संघर्षपूर्ण और अनकही कहानियाँ भी शामिल की गयी हैं। 



किताब की भूमिका जाने-माने सूफ़ी गायक कैलाश खेर (पद्मश्री से सम्मानित जाने-माने सूफी गायक) ने और सम्मतियाँ- आलोक सिन्हा जी,  (वरिष्ठ IAS अधिकारी, उत्तर प्रदेश) श्रीमती मालिनी अवस्थी (पद्मश्री से सम्मानित लोक गायिका), आनंद कुमार (सुपर 30), गौरव अग्रवाल (IAS टॉपर,2013 ) और लेखक नीलोत्पल मृणाल (साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार विजेता) ने लिखी हैं।
272 पृष्ठों की इस किताब की क़ीमत मात्र 195 रुपए है।

क्यों ख़ास है यह किताब ?


परीक्षा की समग्र, संपूर्ण और व्यापक तैयारी के टिप्स 
तैयारी के अनछुए पहलुओं पर खुलकर चर्चा 

परीक्षा के लिए कैसे सँवारें अपना व्यक्तित्व 

 
सकारात्मकता और मोटिवेशन लेवल कैसे बनाए रखें 
प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के लिए विस्तृत मार्ग दर्शन 

 
निबंध और एथिक्स में श्रेष्ठ अंक कैसे पाएँ 
 
लेखन कौशल को कैसे सुधारें 
 
क्या पढ़ें, क्या पढ़ें और कैसे पढ़ें 
 
नए पैटर्न में कैसी हो प्रासंगिक रणनीति 
साथ में सफलता की
 कुछ अनकही कहानियाँ भी..


लेखक परिचय-

निशान्त जैन, 
हिंदी माध्यम के IAS टॉपर
रैंक 13, UPSC CSE-2014


यूपीएससी की वर्ष 2014 की सिविल सेवा परीक्षा में 13वीं रैंक हासिल करने वाले निशान्त जैन, हिन्दी/भारतीय भाषाओं के माध्यम के टॉपर हैं। मुख्य परीक्षा में देश के तीसरे सर्वाधिक अंक (851अंक) प्राप्त करने वाले निशान्त ने निबंध के प्रश्नपत्र में 160 अंक और वैकल्पिक विषय- हिन्दी साहित्य में 313 अंक प्राप्त किये हैं, जो संभवतः सर्वाधिक अंक हैं। उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर, मेरठ में साधारण पृष्ठभूमि में पले-बढ़े, निशान्त 2013 में UPSC की सिविल सेवा परीक्षा के अपने पहले प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो पाये थे।



इतिहास, राजनीति विज्ञान और अंग्रेजी में ग्रेजुएशन और हिंदी साहित्य में पोस्ट-ग्रेजुएशन के बाद यूजीसी की नेट-जे.आर.एफ. उत्तीर्ण की। कॉलिज के दिनों में डिबेट, काव्यपाठ और एंकरिंग के शौक़ीन रहे निशान्त ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से एम.फिल. की और लोक सभा सचिवालय के राजभाषा प्रभाग दो साल काम भी किया।

कविताएं लिखने और युवाओं से संवाद स्थापित करने में रूचि रखने वाले निशान्त; भाषा-साहित्य-संस्कृति, सृजनात्मक लेखन, शिक्षा, समाज कार्य और वंचित वर्गों के कल्याण के क्षेत्रों में गहरा रुझान रखते हैं। वह 2015 बैच के आई.ए.एस. प्रशिक्षु अधिकारी हैं। 

ब्लॉग- nishantjainias.blogspot.in


कहाँ से खरीदें :-

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किताब ऑनलाइन उपलब्ध होने के साथ-साथ देश भर के प्रमुख बुक स्टॉलों पर उपलब्ध है। फिर भी उपलब्ध होने में कोई दिक्कत होने पर प्रकाशक से नीचे लिखे पते व फोन नंबर पर बेहिचक संपर्क करें-

प्रभात प्रकाशन, 4/19, आसफ़ अली मार्ग, दरियागंज, नई दिल्ली -110002

प्रभात प्रकाशन का हेल्पलाइन नम्बर- 7827007777
(सुबह 10 से शाम 6 बजे तक)





Friday, 17 February 2017

सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी हेतु एक सम्पूर्ण किताब : 'मुझे बनना है UPSC टॉपर' -द्वारा- निशान्त जैन



सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी हेतु एक सम्पूर्ण किताब :
'मुझे बनना है UPSC टॉपर' -द्वारा- निशान्त जैन
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प्रिय दोस्तों, उम्मीद है, आप हमेशा की तरह मस्त और व्यस्त होंगे। आखिर इंतज़ार की घड़ियाँ ख़त्म हुई। आपके लिए प्रस्तुत है मेरी ओर से नए साल 2017 का नया और अनूठा उपहार...
मेरी यह किताब -'मुझे बनना है UPSC टॉपर' अब उपलब्ध है। आप इस link पर क्लिक करके इस किताब को amazon पर online खरीद सकते हैं और अपने नज़दीकी बुक स्टॉल से भी। क़ीमत है मात्र 195 रूपए, जो Amazon पर मात्र 163 रुपए में उपलब्ध है। मुझे पूरा विश्वास है कि सिविल सेवा परीक्षा की सम्पूर्ण तैयारी से जुड़े हर पहलू को समेटती यह किताब अपने 18 अध्यायों के माध्यम से परीक्षा की तैयारी के कठिन सफर को आसान बनाने में हर मोड़ पर आपका साथ निभाएगी।
नए पैटर्न में, UPSC की सिविल सेवा परीक्षा में एथिक्स के पेपर में एक सवाल आया- 'आपके लिए सुख की परिभाषा क्या है?' मैंने लिखा- 'जोय ऑफ़ गिविंग' या देने का सुख, मदद करने का सुख। हम पूरी ज़िंदगी किसी न किसी रूप में किसी न किसी की निस्वार्थ भाव से मदद करते ही हैं। आपने भी की होगी। आपने महसूस किया होगा कि उस सुख से मिलने वाला आनंद कितना असीम और अनूठा होता है। जुलाई 2015 की गर्म दोपहर में जब UPSC का परिणाम आया और मुझे अपेक्षा से भी बेहतर सफलता मिली तो लगा कि मदद करने का सुख अब भरपूर मिलेगा। सिविल सेवाओं की ख़ूबी यही है कि ये जीवन के विविध क्षेत्रों में बेहतर काम का बड़ा प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराती हैं और साथ ही कुछ अच्छा योगदान कर 'जॉय ऑफ़ गिविंग' का एक बेहतरीन अवसर तो देती ही हैं।
IAS की परीक्षा में श्रेष्ठ रैंक हासिल करना किसी भी युवा का स्वप्न हो सकता है, पर हर किसी के पास पर्याप्त साधन और संसाधन हों, ये ज़रूरी नहीं। सफलता की राह में कई अड़चनें या रुकावटें हो सकती हैं; किसी के लिए भाषा या मीडियम की वजह से, किसी के लिए ग्रामीण या क़स्बाई पृष्ठभूमि की वजह से तो किसी मामले मैं कमज़ोर सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के कारण। ऐसे में कभी कभी निराशा, अवसाद और उलझनें भी पनपने लगती हैं।
लाख टके का सवाल है कि क्या कोई ऐसा तरीक़ा है, जिससे हम अपनी निराशा से उबर कर, सकारात्मक सोच के साथ, 'अपनी लकीर बड़ी करते हुए' आगे बढ़ें और सफलता का स्वप्न साकार कर पाएँ। यह किताब दरअसल इसी दिशा में एक छोटा सा प्रयास है। साथ ही समय-समय पर प्राप्त होने वाले सवालों और शंकाओं-संदेहों के निराकरण की ईमानदार कोशिश भी।
साथ ही एक और बात भी इस किताब के सृजन से जुड़ी है। सिविल सेवा परीक्षा में चयन के बाद अनेक अवसरों पर युवाओं से संवाद के दौरान मैंने यह स्पष्ट तौर पर महसूस किया कि उन्हें नए पैटर्न की अपेक्षा के अनुरूप, परीक्षा की समग्र तैयारी के लिए एक सम्पूर्ण किताब की शिद्दत से ज़रूरत है। अभी परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए ऐसे कई अनिवार्य पहलू हैं, जिनके प्रति हम जागरूक नहीं हैं। साथ ही, अनजाने में हम बहुत सी ऐसी ग़लतियाँ कर बैठते हैं, जिन्हें सही मार्गदर्शन से सुधारा जा सकता था। साथ ही मैंने यह भी महसूस किया कि ऐसे तमाम युवा अभ्यर्थी हैं, जो बाहर जाकर तैयारी नहीं कर सकते। दूर-दराज़ के गाँवों-क़स्बों-शहरों में रहने वाले ऐसे साथियों के लिए ऐसी एक समग्र किताब एक बड़ी ज़रूरत बन गयी थी। और अगर ऐसी कोई किताब हिन्दी में हो, तो सोने पर सुहागा। हिन्दी में इस तरह की किताबों का ज़बरदस्त अकाल सा है। मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि मेरे लिए यह किताब एक 'दायित्व बोध' और 'कमिटमेंट' की तरह है।
मुझे लगता है कि इस किताब की एक और विशेषता इसे ख़ास बनाती है। यह है- इसकी सबके लिए अनुकूलता। यह किताब ऐसे युवा साथियों के लिए तो ज़रूरी है ही, जो सिविल सेवा अधिकारी बनने का सपना सभी रहे हैं, साथ ही इसमें ऐसे साथियों के लिए भी बहुत सामग्री है, जो पिछले कुछ समय से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं पर सकारात्मक परिणाम नहीं ला पास रहे हैं। कुल मिलकर 18 अध्यायों की यह छोटी मगर कारगर किताब आपकी तैयारी के नज़रिए में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
एक सवाल यह भी हो सकता है कि इस किताब का नाम 'मुझे बनना है UPSC टॉपर' ही क्यों रखा गया। दरअसल, यह किताब संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा की समग्र तैयारी को समर्पित है। पर किताब का यह नाम रखने का एक सहज कारण था। दरअसल जितने भी युवा अभ्यर्थी इस प्रतिष्ठित परीक्षा की तैयारी करते हैं, उनमें से ज़्यादातर के मन में श्रेष्ठ रैंक लाकर UPSC टॉपर बनने का एक सपना छिपा होता है और होना भी चाहिए। मेरे मन में भी कहीं यह ख़्वाब था कि मैं अच्छी रैंक लाऊँ। संयोग से मुझे अच्छी रैंक मिल भी गयी। पर टॉपर्स में ऐसा क्या होता है, जो उन्हें टॉपर बनाता है। मैं ऐसे ही कुछ बेहद महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान देते हुए सम्पूर्ण तैयारी का तरीक़ा साझा करना चाहता था। हालाँकि यह भी ध्यान रखें, कि टॉपर बनना या रैंक लाना या सिविल सेवक बनना ही सब कुछ नहीं है। तनावमुक्त और प्रसन्नचित्त रहते हुए एक सार्थक क्वालिटी लाइफ़ बिताना जीवन में ज़्यादा महत्वपूर्ण है और होना भी चाहिए।
यूपीएससी और राज्य लोक सेवा आयोगों की सिविल सेवा परीक्षाओं की प्रकृति कुछ ऐसी है कि इसमें समग्र दृष्टिकोण, इंटिग्रेटेड एप्रोच, लेखन कौशल, मोटिवेशन लेवल और व्यक्तित्व निर्माण के बग़ैर अंतिम रूप से सफलता मिलना बेहद मुश्किल हो जाता है। इस किताब में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के उद्देश्य और रणनीति से लेकर ऐसे तमाम अनछुए पहलुओं को शामिल करने की कोशिश की गयी है। शायद यही बात इस किताब को सबसे अलग और विशिष्ट बनाती है।
मेरे इस प्रयास से यदि एक भी अभ्यर्थी को थोड़ा सा भी फ़ायदा हुआ या कुछ भी आत्मविश्वास बढ़ा, तो मैं ख़ुद को कृतार्थ समझूँगा। इस अपील के साथ कि हमेशा बड़ा सपना देखें, बड़ी सोच और बड़े जज़्बे के साथ, ये ध्यान रखते हुए कि मुझे अपनी लकीर बड़ी करते हुए ख़ुद को साबित करना है।
मुझे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रेरणा और साहस देने के लिए आप सब साथियों का हृदय से आभार!
Amazon link:-
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Saturday, 21 January 2017

कैसे करें वैकल्पिक विषय- हिन्दी साहित्य की तैयारी (Optional Subject- Hindi Literature for UPSC CSE)

कैसे करें वैकल्पिक विषय- हिन्दी साहित्य की तैयारी

चूँकि सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में मेरा वैकल्पिक विषय 'हिन्दी भाषा का साहित्य' था, जिसमें मुझे सौभाग्य से 500 में से 313 अंक प्राप्त हुए थे, जो 2013 में बदले नए पैटर्न के बाद अभी तक प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ सर्वाधिक हैं। ऐसे अभ्यर्थी, जिन्होंने सोच-विचारकर इसी विषय को मुख्य परीक्षा में चुना है, मैं उनके लिए इस विषय के बारे में कुछ विस्तार से प्रकाश डालने की कोशिश करूँगा।
क्यों चुनें -
- अंकदायी विषय
- हिन्दी माध्यम के लिए सुरक्षित विषय
- सहज, रुचिकर और आनंददायी विषय
- 3-4 माह में तैयारी संभव
- करेंट अफेयर्स से अपडेट करने की ज़रूरत नहीं 
- निश्चित और स्पष्ट पाठ्यक्रम
- लेखन कौशल का विकास।  निबंध, एथिक्स में मिल सकता है फायदा।
- विषय का बैकग्रॉउंड ज़रूरी नहीं। यद्यपि मैंने हिन्दी साहित्य में M.A., M.Phil. किया है पर अधिकांश सफल अभ्यर्थियों की पृष्ठभूमि साहित्य की नहीं होती। (एक उदाहरण- CSE 2014 में रैंक 49, पवन अग्रवाल ने इंग्लिश मीडियम से परीक्षा उत्तीर्ण की, पर वैकल्पिक विषय हिन्दी साहित्य था )
क्यों न चुनें -
- यदि हिन्दी भाषा को लिखने या पढ़ने में भी दिक्कत हो,
- विषय का दायरा व्यापक, पढ़ने को बहुत कुछ,
- भाषा-साहित्य बिल्कुल पसंद न हों।
- सामान्य अध्ययन में यह विषय मदद नहीं करता।
तैयारी कैसे करें-
हिन्दी साहित्य मेरा पसंदीदा विषय है। इसे पढ़कर मुझे अजीब सा सुकून मिलता है। सिविल सेवा परीक्षा के वैकल्पिक विषयों की सूची में भी हिन्दी साहित्य अभ्यर्थियों का एक पसंदीदा विषय है। हिंदी माध्यम के छात्रों का इस विषय की ओर सहज रुझान रहा है। इस विषय की लोकप्रियता का कारण इसका रुचिकर होने के साथ-साथ अंकदायी होना भी है। आइये, बात करते हैं हिन्दी साहित्य को वैकल्पिक विषय के रूप में लेने वालों के लिए, बेहतर प्रदर्शन के कुछ जरुरी बिन्दुओं की :
-पाठ्यक्रम में निर्धारित सभी पुस्तकों को पढ़ जरूर लें, ताकि व्याख्या करते समय सही सन्दर्भ लिख सकें।
-व्याख्या खंड में सही सन्दर्भ पहचानना बेहद ज़रूरी है। पद्य खंड में सन्दर्भ पहचानना आसान होता है और व्याख्या करना कठिन। जबकि गद्य खंड में सन्दर्भ पहचानना कठिन होता है और व्याख्या करना आसान।
 -पूरे पाठ्यक्रम को एक बार पढ़ जरूर लें ताकि सब लेखकों और उनकी निर्धारित रचनाओं  के बारे में आपको बेसिक जानकारी जरूर हो, ताकि मुश्किल वक़्त में उसका प्रयोग कर पाएं। अब नए पैटर्न में चयनात्मक अध्ययन से काम चलाना मुश्किल है। पर हाँ, हर खण्ड में कुछ अध्याय चुनकर उन्हें अधिक बेहतर ढंग से तैयार कर सकते हैं।
-चूँकि अब प्रश्नों की संख्या ज़्यादा होती है और शब्दसीमा कम, इसलिए पूरे पाठ्यक्रम की थोड़ी-थोड़ी जानकारी और समझ अवश्य रखें। हर टॉपिक को संक्षेप में तैयार कर लें।
पाठ्यक्रम- प्रश्नपत्र-1
खण्ड 'क' - हिन्दी भाषा और नागरी लिपि का इतिहास
खण्ड 'ख'- हिन्दी साहित्य का इतिहास
प्रश्नपत्र-2
खण्ड 'क'- पद्य साहित्य
खण्ड 'ख'- गद्य साहित्य
-प्रश्नपत्र-1 के खण्ड 'ख' (हिन्दी साहित्य का इतिहास) को ढंग से तैयार कर लें। यह प्रश्नपत्र-2 में भी काम आएगा। हिन्दी साहित्य का विकास किस तरह हुआ, इसे क्रमबद्ध तरीके से मोटे तौर पर समझ लें।
-विभिन्न लेखकों और कवियों के कथन और काव्य पंक्तियाँ दोनों प्रश्नपत्रों, विशेषकर द्वितीय प्रश्नपत्र में विशेष महत्त्व रखती हैं। उदाहरण देने से आपके कथन और तर्कों की पुष्टि हो जाती है। इसलिए प्रसंग के अनुरूप उदाहरण लिखने में हिचकिचाएं नहीं। पर ध्यान दें, उदाहरण प्रासंगिक और संगत लगने चाहिएं, ऊपर से थोपे हुए नहीं।
-आपने इन कोटेशन्स को जहां भी नोट किया है, (बेहतर होगा कि एक डायरी बना लें), वहां से इन्हें निरंतर दोहराते रहें। पर साथ ही हर पंक्ति के साथ उसका प्रसंग या प्रतिपाद्य जरूर लिख लें। मसलन, 'कबीर की भाषा' के बारे में लिखते हुए 'संस्किरत है कूप जल, भाखा बहता नीर' लिख सकते हैं। 'काहे री नलनी, तू कुम्हिलानी' से 'कबीर के दर्शन और रहस्यवाद' को जोड़ लें। 'किलकत कान्ह घुटरुवनि आवत', 'सूर के वात्सल्य' का अच्छा उदाहरण है। 'समन्वय उनका करे समस्त, विजयिनी मानवता हो जाय', 'कामायनी के समरसता के दर्शन' को प्रतिपादित करती हैं।  
-भाषा खंड को लेकर अभ्यर्थियों में एक अजीब सा भय रहता है। दरअसल यह खंड कम मेहनत में अधिक अंक देता है। इसकी सभी यूनिट्स को संक्षेप में तैयार कर लें। मसलन पाली, प्राकृत और अपभ्रंश में से प्रत्येक की अगर आपको 6-7 विशेषतायें पता हैं तो इतना काफी है। राजभाषा, राष्ट्रभाषा, संपर्क भाषा को ठीक से तैयार करना बेहतर विकल्प है।
-व्याकरणिक अशुद्धियों से बचने का अभ्यास।  सहज व सरल भाषा का प्रयोग। अभ्यास करना ज़रूरी, धीरे-धीरे लेखन कौशल विकसित होता जाएगा।
क्या पढ़ें और क्या नहीं-
-पाठ्यक्रम में निर्धारित सारी मूल टेक्स्ट बुक्स =,
- NCERT 11th class- साहित्य शास्त्र परिचय
- हिन्दी साहित्य का संक्षिप्त इतिहास- डॉ विश्वनाथ त्रिपाठी,
- हिन्दी साहित्य का इतिहास- डॉ नगेन्द्र
-हिन्दी भाषा- डॉ हरदेव बाहरी,
- छायावाद- डॉ नामवर सिंह
-कबीर- हजारी प्रसाद द्विवेदी
-कविता के नए प्रतिमान- नामवर सिंह
-हिन्दी साहित्य और संवेदना का विकास- डॉ रामस्वरूप चतुर्वेदी
-किसी अच्छी कोचिंग के नोट्स देख लें।
-यदि रुचि हो तो एक साहित्यिक पत्रिका जैसे 'आजकल', या 'नया ज्ञानोदय' पढ़ सकते हैं। अच्छा लगेगा और साहित्य की नवीनतम प्रवृत्तियों के प्रति भी सहज हो पाएंगे।
उत्तर कैसे लिखें-
-समग्रता और संश्लिष्टता
-क्रमबद्ध और व्यवस्थित
-कथन की पुष्टि हेतु यथासम्भव उदाहरण देना न भूलें,
- अगर पूरी कोटेशन याद न आए, तो सिंगल इनवर्टिड कोमा लगाकर आधी या चौथाई कोटेशन भी लिख सकते हैं।
-पैराग्राफ बनाकर लिखें, बुलेट पॉइंट नहीं।
- साफ-सुथरा और व्याकरणिक दृष्टि से सही लिखने की कोशिश करें।
-यदि चाहें तो महत्वपूर्ण बातों को अंडरलाइन कर सकते हैं।
रिवीजन कैसे करें - 
-रिवीजन अनिवार्य
-पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद उसे एक-दो बार जरूर दोहरा लें,
-एक डायरी में यह नोट कर लें कि आपने पाठ्यक्रम का कौन सा हिस्सा कहां से पढ़ा है। दोहराते वक़्त काम आएगा।
-परीक्षा से एक दिन पहले दोहराने के लिए कुछ अति महत्वपूर्ण संक्षिप्त पॉइंट्स भी तैयार कर लें।
- फुर्सत में या मौका मिलने पर मूल टेक्स्ट बुक्स को यूं ही पढ़ते रहें।
-परीक्षा के पूर्व अनावश्यक विस्तार से बचते हुए पूरे पाठ्यक्रम को संक्षेप में दोहरा लें।
परीक्षा हॉल में कैसे अच्छा प्रदर्शन करें-
-
-कोशिश करें कि प्रश्नपत्र को क्रमवार हल करते चलें।  क्योंकि परीक्षक भी स्वाभाविक रूप से उसी क्रम में कॉपी जांचेंगे।
-हिन्दी के पेपर में जीएस की तरह वक़्त की उतनी कमी नहीं होती, अतः पूरा प्रश्नपत्र हल करने का प्रयास करें।
-यदि मैं अपनी बात करूँ, तो मुझे प्रथम प्रश्नपत्र में भाषा खंड और द्वितीय प्रश्नपत्र में काव्य खंड अधिक प्रिय हैं। और मैंने इन्हीं से अधिक प्रश्न हल किये थे। आप भी मन में विचार कर लें कि कौन से खण्डों से ज़्यादा प्रश्न हल करने हैं।
-हिंदी साहित्य के उत्तर पैराग्राफ में ही लिखें, बिन्दुवार नहीं।

-सहज और सरल भाषा का प्रयोग बेहतर है, पर ज़रूरत पड़ने पर साहित्यिक शब्दावली का प्रयोग करने में कतई न हिचकिचाएं।
------ निशान्त जैन 

अस्त-व्यस्त नहीं, व्यस्त और मस्त रहें...

अस्त-व्यस्त नहीं, व्यस्त और मस्त रहें...

एक हैं श्रीमान 'क'। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के प्रति पूर्ण समर्पित। निष्ठा और समर्पण में कोई कमी नहीं। सोने और खाने के लिए कुछ समय बमुश्किल निकालकर, बाक़ी समय बस पढ़ते हैं। इतना पढ़ते हैं कि अड़ोस-पड़ोस के साथी इनसे लगभग भयाक्रांत रहते हैं। लिखते भी ठीक-ठाक हैं और स्मरण शक्ति भी बढ़िया है। सिलेबस भी पूरा तैयार है। इनके रूम पर इतनी किताबें और नोट्स का अंबार है, कि आप देखने मात्र से ही तनाव में आ जाएँ।
पर आश्चर्यजनक रूप से पिछले काफ़ी समय से परीक्षाओं में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। नतीजा हर बार सिफ़र।
उनके क़रीबी दोस्त बताते हैं कि वे इतनी मेहनत के बावजूद अनियमित और बेतरतीब दिनचर्या के शिकार हैं और विशेषकर परीक्षा के दिनों बेहद तनाव और दुश्चिंता से ग्रस्त हो जाते हैं।

दूसरे हैं श्रीमान 'ख'। जीवन कुछ हद तक व्यवस्थित सा है इनका। अक्सर व्यस्त रहते हैं। पढ़ाई भी जमकर करते हैं और कभी-कभार मस्ती भी। दोस्तों के भी पसंदीदा साथी हैं श्री ख। टाइम मैनेजमेंट ऐसा कि थोड़ा-बहुत वक़्त अपनी रूचियों के लिए भी निकाल ही लेते हैं। जब भी आप इनसे मिलेंगे तो इनके चेहरे पर एक मंद मुस्कान तैरती हुई मिलेगी। परीक्षा के दिनों में अतिरिक्त तनाव इनके लिए अजीब सी बात है और ये जनाब अपने चिरपरिचित शांत स्वभाव को परीक्षाओं में भी क़ायम रखते हैं। इनके बारे में एक और दिलचस्प बात यह है कि जितना इनपुट ये देते हैं, उससे ज़्यादा इनका आउटपुट रहता है। ये महोदय श्रीमान क जितना तो नहीं पढ़ पाते, पर जितना पढ़ते हैं, व्यवस्थित और नियमित ढंग से, वो भी रिवीज़न के साथ।

प्रिय दोस्तों, हमारे आस-पास श्रीमान 'क' और श्रीमान 'ख' जैसे तमाम साथी मिल जाएँगे। हो सकता है कि आप में से भी कई साथियों के लक्षण श्रीमान 'क' या श्रीमान 'ख' से मिलते-जुलते हों। इसी बीच मैं आपसे एक सवाल भी पूछना चाहता हूँ, जिसका ईमानदार जवाब आपको ख़ुद को ही देना है।
क्या आपके साथ भी ऐसी ही समस्या है कि आप मेहनत तो ख़ूब करते हैं, पर नतीजे नहीं मिल पाते। तैयारी भरपूर है पर इतनी अव्यवस्थित है कि आपको ख़ुद नहीं मालूम कि मैंने फ़लाँ टॉपिक कितनी किताबों से या किन-किन स्त्रोतों से पढ़ा है? क्या आपको कभी-कभी ऐसा लगता है, मेरा अमुक साथी जो मुझसे कम पढ़ता था, वह परीक्षा में सफल कैसे हो गया? या मैंने जिसे पढ़ाया, वही मुझे पीछे छोड़कर ख़ुद चयनित हो गया? क्या आपको ऐसा लगता है कि जितनी पढ़ाई मैंने की, उसके अनुरूप मुझे कभी परिणाम मिला ही नहीं। या फिर यह महसूस हुआ हो कि मेरी तैयारी में ऐसी कौन सी कमी है कि सफलता मेरे पास आकर भी दूर छिटक जाती है?
अगर आपको ये सारे सवाल या इनमें से कुछ सवाल भी मथते हैं तो आपको निश्चित रूप से आत्ममंथन कर लेना चाहिए। हो सकता है कि आपकी स्थिति श्रीमान 'क' से मिलती-जुलती हो। हो सकता है कि आप अस्त-व्यस्त तरीक़े से तैयारी करते हों और अस्त-व्यस्त तरीक़े से ही उसे परीक्षा में लिखकर आते हों। 
साथियों, आप यह बात समझ रहे होंगे कि दरअसल हमें श्रीमान 'क' से श्रीमान 'ख' तक की यात्रा तय करनी है। सफलता की राह को जटिल न बनाकर उसे सरल और सहज बनाते हुए सफलता की सम्भावना को बढ़ाना है और आगे बढ़ते जाना है।
आपने समझा कि 'अस्त-व्यस्त' तरीक़े से पढ़ाई और तैयारी के क्या-क्या साइड इफ़ेक्ट होते है? जबकि हमारे ही बीच कुछ साथी व्यस्त और मस्त रहकर अपेक्षाकृत कम तैयारी के बावजूद बेहतर नतीजे हासिल कर लेते हैं।
आइए, चर्चा करते हैं कि ऐसा क्यों होता है। दरअसल 'व्यस्त' रहना एक बात है, और 'अस्त-व्यस्त' रहना दूसरी बात। सफल होने और साथ ही ख़ुश रहने के लिए, व्यस्त रहना निश्चय ही ज़रूरी है, पर अस्त-व्यस्त तरीक़े से व्यस्त रहना क़तई ज़रूरी नहीं है। इसके बजाय मस्त रहते हुए व्यस्त रहना कई गुना बेहतर है। मस्त और व्यस्त रहने का सीधा सा फ़ायदा यह होता है कि आप व्यर्थ के तनाव से बचे रहते हैं और परीक्षा में भी शांत और सहज मन से बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं। 
आइए, जानें, 'व्यस्त और मस्त' रहने के फ़ायदे-
-आप अमूमन प्रसन्न रहते हैं और आपमें सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।
- आप जो भी पढ़ते हैं, उसे एंजॉय करते हैं और तनावपूर्ण समय में भी सहज रहते हैं।
- सहज और शांत रहने की इस आदत के चलते आप परीक्षा हॉल में भी आपका प्रदर्शन औसत से बेहतर रहता है, क्योंकि आप दिमाग पर अनावश्यक भार रखे बिना खुलकर लिख पाते हैं।
- साथ ही साथ आप परीक्षा के परिणाम को लेकर ज़्यादा चिंतित भी नहीं होते और हर परिस्थिति के लिए तैयार रहते हैं। एक कहावत भी है- 'Try for the best, prepare for the worst.'

दरअसल व्यस्त रहना एक नियामत की तरह है। और अगर मस्त रहकर व्यस्त रहा जाय, तो यह सोने पर सुहागा ही है। व्यस्त रहने से आपको एक संतुष्टि का भाव महसूस होता है और आप अपने दिन को जस्टीफ़ाई कर पाते हैं।
पर आख़िर ऐसे कौन से तरीक़े हैं, जिनसे हम अपनी आदत में कुछ बदलाव लाते हुए बिज़ी रहते हुए भी ख़ुश रह सकते हैं।
- दिनचर्या को नियमित करने की कोशिश करें। 'परफ़ेक्ट' दिनचर्या जैसी कोई चीज़ नहीं होती। जहाँ तक सम्भव हो, एक ठीक-ठाक दिनचर्या बनाकर उसका पालन करने की कोशिश करें।
- अस्त-व्यस्त और अव्यवस्थित रहने की आदत से धीरे-धीरे छुटकारा पाएँ। जैसे कि आप स्टडी का एक शेड्यूल बना लें, जिसमें पढ़ाई के साथ-साथ अभ्यास, रिवीज़न और लेखन का भी समुचित स्थान हो।
- अपने स्वत्व और सहजता को बनाए रखें। अपने शौक़ व रूचियों और फ़िटनेस व हाईजीन का भी ख़याल रखें। अपनी दिनचर्या में योग व प्राणायाम को शामिल करने का प्रयास करें।
- व्यस्त रहना आपको शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ बनाए रखता है। पर साथ ही प्रसन्नचित्त और मस्त रहकर पढ़ाई करने का अपना हो आनंद है।
- स्वयं ख़ुश रहें, तभी आप दूसरों को भी ख़ुश कर सकते हैं। प्रसन्नता संक्रामक होती है। भीतर से ख़ुश रहें और बाहर भी ख़ुश दिखें। 
शुभकामनाओं सहित-
निशान्त 
(लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं।)